Monday, 25 August 2008

दिल्ली में हैं झाड़खण्ड। अलोका

श्रमशील
दिल्ली में
ठोकर खा रहे
फुटपाथ पर
झाड़खण्ड का भविष्य
घर छोड.ने पर किया मजबूर ।
गिरतेेे- पड़तेे जी रहे है।
अपनो से दूर
गुम हो रहे है सपने ।
दिल्ली के गलियों में
अपनी ही लोगो से
लूट रही परम्परा; संस्कृति
बस बाजार में।
खो जाती है बड़े नगरो में
बेचती है अपना श्रम
पुछते है आस-पास के लोग
कहते है ......................
दिल्ली में है झाड़खण्ड।

अब बनेंगे बांध आंसू के।

अलोका
कोई कोना देश काबांध बांधने से बचा नही।
नदी का किनाराबांध से अछुता नही।

नाली के पानी तक कोबांधने की योजना चल पड़ी।

सागर के पानी

देशो में बटवारा हो चुकी।

कई नदियां अब बिक चुकीधरती का पानी बचा नहीं

लगते लगाम

आंसू पर अब बंधेगे बांध आंसू के

एक काॅमरेड का bhshan

अलोका
आज
भाषणआज की व्यवस्था पर अर्ज
तमतमाया हुए चेहरे
सेट पकने लगे है
शब्द और ध्वनि
मुट्ठी बन्द
तने हुए हाथ
तलवार से कम नहीं वाणी की धार
खुलने का नाम नहीं लेती मुट्ठी
खत्म होने का नाम नही लेते
खौलते शब्द विचार
विचारों के पसीने से परीजता
सफेद कुरते का काॅलर
बढ़ी रही शरीर की थरथराहट
चेहरे की तमतमाहट‘ शब्दों की धार
अब साम्राज्यवाद पर हमला तय है।

Wednesday, 28 May 2008

पाश

सब से खतरनाक होता है
मुर्दा शान्ति से मर जन
न होना तड़प का
सब सहन कर जाना
घर से निकलना कम पर
ओर कम से लोटकर घर जाना
सबसे खतरनाक होता है
हमारे सपनो का मर जाना

Monday, 14 January 2008

ग़ालिब

ग़ालिब का ज़माना मिर्जा़ असद उल्लाह खाँ ‘ग़ालिब’ 27 दिसंबर 1797 को पैदा हुए। सितंबर, 1796 में फ्रांसीसी- पर्दों- जो अपनी क़िस्मत आज़माने हिन्दुस्तान आया था दौलत राव सिंधिया की ‘शाही फ़ौज’ का सिपहसालार बना दिया गया। इस हैसियत से वह हिन्दुस्तान का गवर्नर भी था। उसने देहली का मुसासरा करके1 उसे फ़तह2 कर लिया था, और अपने एक ‘कमांडर- ले मारशां- को शहर का गवर्नर और शाह आलम का मुहाफ़िज़3 मुक़र्रर4 किया। उसके बाद उसके आगरा पर क़ब्जा किया। अब शुमाली5 हिन्दुस्तान में उसके मुक़ाबले का कोई नहीं था, और उसकी हुकूमत एक इलाके पर थी जिसकी सालामा माल गुज़ारी6 दस लाख पाउंड से ज़्यादा थी। वह अलीगढ के क़रीब एक महल में शाहाना7 शानो-शौकत8 से पहता था। यहीं से वह राजाओं के नाम अहकामात9 जारी करता और बग़ैर किसी मदाख़लत10 के चंबल के समतल तक अपना हुक्म चालाता था। 15 सितंबर, 1803 ई० को जनरल लेख सिंधिया के एक सरदार बोगी ईं को शिकस्त11 देकर फ़ातेहाना12 अंदाज में दहेली में दाख़िल हुआ। बोगी ई का कुछ अर्से तक शहर में कब्ज़ा रह चुका था और उसने इस अंग्रेजों के लिए खाली करने से पहले बहुत एहतेमाम13 से लूटा था। जनरल लेक शहंशाह की ख़िदमत में हाज़िर हुआ उसे बड़े-बड़े खिताब14 दिए गए और शाह आलम और उसके जा-नशीन15 ईस्ट इंडिया कम्पनी के वज़ीफ़ा-ख़्वार16 हो गए।

Saturday, 12 January 2008

पहाड- पर पहाड-
बताया गया
कोशिश चल रही थी
समाजवाद लाने की
बिगुल बने
अशव सजे माच् फ*ट हुए
कदम मिलने पर
तालिया बजी
पर आंखे खाुली
तो बस बाजार थे
दुखाों के पहाड
दो दुनी चार थे।एक कॉमरेड का भाषण
आज की बेवास्थ पर अर्ज
तम्तमय हुआ चहरे
aloka

Thursday, 3 January 2008



सुनिधि चौहान के साथ 'एक मुलाकात'
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाकात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की जिंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं। एक मुलाकात में हमारी मेहमान हैं आज के दौर की बहुत ही सफल पार्श्व गायिका सुनिधि चौहान।* आप तो इतनी कम उम्र की लग रही हैं, मैंने ऐसा सुना है कि आप बहुत छोटी उम्र से गाने गा रही हैं।
मैने चार साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया था। लेकिन फिल्मों में 11 साल की उम्र में गाना शुरू किया।* आपको कब पता लगा कि आप गा सकती है?
मैं तो डांस में अधिक रुचि लेती थी। लेकिन मेरे मम्मी-पापा और उनके दोस्तों को लगा कि मैं अपनी गायकी में निखार लाकर अच्छी गायिका बन सकती हूँ। मेरी मम्मी-पापा ने बहुत मेहनत की।* आपने सबसे पहले कहाँ गाया?
सबसे पहले मैंने एक जागरण में गाया था। माता के सम्मान में दो गाने गाए थे। वहीं से लोगों को लगने लगा कि मुझे दूसरी जगहों पर भी गाना चाहिए। इस तरह मेरी माँग बढ़ती गई। जब कोई बड़े समारोह होते और उसमें बड़े स्टार आते तो मैं दिल्ली की तरफ से गाने वाले गायकों में होती। इन लोगों में मेरी ही उम्र सबसे कम होती थी। इस तरह मेरा काम के रोमांचक शुरुआत हुई।* फिल्मों में गाना कब शुरू हुआ?
मैं मुंबई गई थी। वहाँ तबस्सुम जी ने मुझे कल्याणजी भाई से मिलवाया। मैंने उनकी अकादमी में डेढ़-दो साल संगीत सीखा और उस दौरान कई शोज किए। फिर कल्याणजी भाई ने मुझे फिल्म फेयर पुरस्कार समारोह में गाने का मौका दिया, जहाँ आदेश श्रीवास्तवजी की नजर मुझ पर पड़ी और उन्होंने मुझे फिल्मों में काम दिया।* मैंने ऐसा भी सुना है कि आप किसी टीवी शो में भी जीती थीं। ये फिल्म में गाने से पहले था कि बाद में?
पहले, इसके बाद दो-तीन साल मैंने कुछ अधिक नहीं किया। क्योंकि मेरी आवाज न बड़े जैसी थी न छोटे बच्चे जैसी। बस कुछ आलाप किए थे। तभी पता लगा कि डीडी वन टीवी चैनल पर एक टैलेंट हंट शुरू हो रहा है जिसके फाइनल में लताजी का आना होगा। मैं लता जी को आज भी पूजती हूँ। मैं उनसे मिलकर, उन्हें छूकर महसूस करना चाहती थी कि कैसा लगता है। मैंने उस कार्यक्रम में लताजी की वजह से उसमें हिस्सा लिया और प्रतियोगिता जीत भी ली। लताजी के हाथों पुरस्कार लिया।* तो आपने उन्हें छुआ?
मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपको छू सकती हूँ और फिर उन्हें छुआ। मेरी आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने मेरे आँसू पोछें और कहा कि जब कभी भी कोई जरूरत हो तो मुझे बताना।* निधि से सुनिधि कैसे हुआ आपका नाम?
कल्याण जी भाई के अकादमी से जो भी लोग निकले सबका नाम ‘स’ से शुरू होता था जैसे साधना सरगम, सोनाली वाजपेयी, सपना मुखर्जी। मेरा नाम भी निधि से सुनिधि चौहान हो गया। संगीत भी ‘स’ से शुरू होता है और सरगम भी ‘स’ से शुरू होती है।* आपकी पसंद का एक गाना बताएँ।नई नहीं ये बातें हैं पुरानी कैसी पहली है जिंदगानी....

जा
सुनिधि चौहान के साथ 'एक मुलाकात'
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाकात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की जिंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं। एक मुलाकात में हमारी मेहमान हैं आज के दौर की बहुत ही सफल पार्श्व गायिका सुनिधि चौहान।* आप तो इतनी कम उम्र की लग रही हैं, मैंने ऐसा सुना है कि आप बहुत छोटी उम्र से गाने गा रही हैं।
मैने चार साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया था। लेकिन फिल्मों में 11 साल की उम्र में गाना शुरू किया।* आपको कब पता लगा कि आप गा सकती है?
मैं तो डांस में अधिक रुचि लेती थी। लेकिन मेरे मम्मी-पापा और उनके दोस्तों को लगा कि मैं अपनी गायकी में निखार लाकर अच्छी गायिका बन सकती हूँ। मेरी मम्मी-पापा ने बहुत मेहनत की।* आपने सबसे पहले कहाँ गाया?
सबसे पहले मैंने एक जागरण में गाया था। माता के सम्मान में दो गाने गाए थे। वहीं से लोगों को लगने लगा कि मुझे दूसरी जगहों पर भी गाना चाहिए। इस तरह मेरी माँग बढ़ती गई। जब कोई बड़े समारोह होते और उसमें बड़े स्टार आते तो मैं दिल्ली की तरफ से गाने वाले गायकों में होती। इन लोगों में मेरी ही उम्र सबसे कम होती थी। इस तरह मेरा काम के रोमांचक शुरुआत हुई।* फिल्मों में गाना कब शुरू हुआ?
मैं मुंबई गई थी। वहाँ तबस्सुम जी ने मुझे कल्याणजी भाई से मिलवाया। मैंने उनकी अकादमी में डेढ़-दो साल संगीत सीखा और उस दौरान कई शोज किए। फिर कल्याणजी भाई ने मुझे फिल्म फेयर पुरस्कार समारोह में गाने का मौका दिया, जहाँ आदेश श्रीवास्तवजी की नजर मुझ पर पड़ी और उन्होंने मुझे फिल्मों में काम दिया।* मैंने ऐसा भी सुना है कि आप किसी टीवी शो में भी जीती थीं। ये फिल्म में गाने से पहले था कि बाद में?
पहले, इसके बाद दो-तीन साल मैंने कुछ अधिक नहीं किया। क्योंकि मेरी आवाज न बड़े जैसी थी न छोटे बच्चे जैसी। बस कुछ आलाप किए थे। तभी पता लगा कि डीडी वन टीवी चैनल पर एक टैलेंट हंट शुरू हो रहा है जिसके फाइनल में लताजी का आना होगा। मैं लता जी को आज भी पूजती हूँ। मैं उनसे मिलकर, उन्हें छूकर महसूस करना चाहती थी कि कैसा लगता है। मैंने उस कार्यक्रम में लताजी की वजह से उसमें हिस्सा लिया और प्रतियोगिता जीत भी ली। लताजी के हाथों पुरस्कार लिया।* तो आपने उन्हें छुआ?
मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपको छू सकती हूँ और फिर उन्हें छुआ। मेरी आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने मेरे आँसू पोछें और कहा कि जब कभी भी कोई जरूरत हो तो मुझे बताना।* निधि से सुनिधि कैसे हुआ आपका नाम?
कल्याण जी भाई के अकादमी से जो भी लोग निकले सबका नाम ‘स’ से शुरू होता था जैसे साधना सरगम, सोनाली वाजपेयी, सपना मुखर्जी। मेरा नाम भी निधि से सुनिधि चौहान हो गया। संगीत भी ‘स’ से शुरू होता है और सरगम भी ‘स’ से शुरू होती है।* आपकी पसंद का एक गाना बताएँ।नई नहीं ये बातें हैं पुरानी कैसी पहली है जिंदगानी....Source : www.bbchindi.com
* आपका पहला हिट गाना राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘मस्त’ से था।
हाँ, रामगोपाल वर्मा की फिल्म थी, संदीप चौटा जी का संगीत था। उनसे मुझे सोनू निगम ने मिलवाया था। उससे पहले हीं कुछ भी नहीं थी। इस फिल्म से मेरी पहचान बनी।* आदेश श्रीवास्तव ने कौन सा गाना गवाया था?
‘शस्त्र’ फिल्म का गाना था लड़की दीवानी, देखो लड़का दीवाना...लेकिन गाना चल नहीं पाया।
* अपने काम में मेहनत के अलावा और क्या जरूरी है?फोकस, आपको पता होना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं।* आप कहाँ फोकस कर रही हैं?
गायकी पर, मैं बीच में भागती रहती हूँ, लेकिन मेरा फोकस गायकी में बना रहता है। यही मेरी जिंदगी और प्यार है। मेरा वजूद ही संगीत है। अगर मैं गायिका नहीं होती तो भी गायिका होती। बस छोटी गायिका होती।
* कोई ऐसा गाना जो किसी और ने गाया हो और आप गाना चाहती हूँ?
फिल्म ‘ओंकारा’ का गाना है जो रेखा भारद्वाज ने गाया था। लाकड़ जलकर कोयला होय जाए जिया जले तो कुछ न होय न कोयला न राख..जिया न जलइयो रे...* सोनू निगम के अलावा पुरुष गायकों में से आपको सबसे अधिक पसंद कौन है?
केके बहुत पसंद है। शान के कुछ गाने हैं। रूप कुमार राठौर भी अच्छा गाते हैं। उनका अनवर का मौला...गाना बहुत अच्छा था। सुखविंदर को मैं कैसे भूल सकती हूँ।* जिंदगी के रोमांचक पलन्यूयॉर्क के एक शो में अमिताभजी के पहले मेरा कार्यक्रम था। मैंने गाना गाया तो लोगों ने खड़े होकर मुझे सम्मान दिया था। उसके बाद अमिताभजी आए और मुझे गोदी में उठा लिया और कहा अब हम क्या करें भाई, इस लड़की ने तो हम सबकी छुट्टी कर दी और दूसरी बार जब लताजी के हाथों मुझे सम्मान मिला।* आपको कोई ऐसा प्रशंसक मिला है जो आपको और आपकी गायकी को पागलपन की हद तक पसंद करता हो?
एक आदमी है। उसे वो सबकुछ मालूम है मेरे बारे में जो मुझे भी नहीं मालूम। उसे मेरे हर शो के बारे में पता है। उसे ये भी पता है कि मैंने किसी शो में कौन से कपड़े पहने थे और कौन सी लिपिस्टिक लगा रखी थी। ऐसे प्रशंसक होना बड़ी बात है।


मशहूर गायिका आबिदा परवीन कहती हैं कि संगीत में वो ताक़त होती है कि वह सरहदों को भी जोड़ सकती है. वह मानती हैं कि राजनीति और मजहब ने जो खाइयाँ पैदा की हैं उसे भी संगीत पाट सकती है...

Sunday, 30 December 2007

डॉ विनायक सेन की गिरफ्तारी के विरोध में आवाज़डॉ विनायक सेन की गिरफ्तारी के विरोध में न केवल भारत में बल्कि भार्तिये मूल के विदेशों में रहने वाले लोगों ने भी आवाज़ उठाई है।भारतीये प्रधान मंत्री डॉ मन मोहन सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री डॉ रमण सिंह, आदि को समर्थन करने वालों की बढती हुई सूची के साथ ज्ञापन जा रहे हैं कि डॉ सेन को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा किया जाये।

एसोसिएशन फॉर इंडिया'एस देवेलोप्मेंट (Association for India's Development) के कार्यकर्ताओं ने गहरी चिंता व्यक्त की क्योकि सुप्रीम कोर्ट ने डॉ सेन की 'बेल' याचिका न मंजूर कर दी।
डॉ सेन १४ मई २००७ को छत्तीसगढ़ स्पेशल पब्लिक सिक्यूरिटी एक्ट २००६ के तहत गिरफ्तार हुए थे। यह छत्तीसगढ़ का एक खतरनाक और अमंविये कानून है जो प्रदेश सरकार को खुली छूट देता है कि किसी को भी नाक्साल्वादियों से सम्पर्क रखने के शक कि बुनियाद पर गिरफ्तार कर लिया जाये। डॉ सेन का कहना है कि उन्होंने प्रदेश सरकार की संस्तुति के बाद ही जेल में कैद नाक्साल्वादियों से सम्पर्क किया था। आज तक प्रदेश सरकार डॉ सेन के खिलाफ कोई ठोस सबूत नही जुटा पाई है।
हालांकि डॉ सेन नाक्सालवाद के नाम पर बिना सबूत ७ महीनों से गिरफ्तार है परन्तु प्रदेश में न्याय व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। दंतेवाडा जेल कारागार में सुरक्षा व्यवस्था का टूटना, और बढ़ता हुआ हिंसा से जुदा मृत्यु-दर इस बात की पुष्टि करता है।
डॉ बिनायक सेन च्रिस्तियन मेडिकल कॉलेज से डाक्टरी पढ़ के छत्तीसगढ़ में जन-स्वास्थ्य पर सरह्निये कार्य कर रहे थे। डॉ सेन छत्तीसगढ़ के सामाजिक न्याय के लिए जन संगठन (प यू सी ल) के सचिव हैं। वें पिछले २५ सालों से समाज सेवा में सक्रिए भूमिका अदा कर रहे हैं, और दल्ली राज्घारा में खानों में काम करने वालों के लिए शहीद अस्पताल की स्थापना का श्रेय भी उनको जाता है।
देश-विदेश से लोगों की माँग है कि:* डॉ सेन को बिना विलम्ब रिहा किया जाये और उनके विरोध में सारे मुक़दमे खारिज किये जाये* चात्तिस्गार्फ प्रदेश सरकार बिना विलम्ब प्रदेश में न्याय एवं शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए मुमकिन कदम उठाए और नक्सल एवं सलवा जुडूम की हिंसक गतिविदियों पर रोक लगे* प्रदेश सरकार सलवा जुडूम को समर्थन देना बंद करे* प्रदेश सरकार सब वर्गों के हित को ध्यान में रखे और ये भी ध्यान में रखे कि लोग नाक्सालवाद का समर्थन क्यो करते हैं?इसके पहले भी ये प्रदेश एक समर्पित कार्यकर्ता शंकर गुहा नियोगी को खो चुका है। ७ महीनों से बिना कोई ठोस सबूत के डॉ सेन जेल में कैद हैं, ये बेहद चिंता का विषय है। ये लोकतंत्र पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है जहाँ गरीब और कम्जूर वर्गों के हित की बात करने वालों की आवाज़ प्रदेश दबाने की कोशिश करता है।